गोंदिया: सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया पर रील्स बनाने पर रोक, सख्त नियम होंगे लागू

Gondia: Government employees are prohibited from making reels on social media, strict rules will be implemented

महाराष्ट्र सरकार सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम बनाने जा रही है। 1979 के सेवा शर्त नियमों में संशोधन कर इन नियमों को सेवा की शर्तों का हिस्सा बनाया जाएगा। इस संबंध में जल्द ही एक सरकारी आदेश (GR) जारी किया जाएगा।

विधान परिषद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सरकारी कर्मचारियों के अनुशासनहीन व्यवहार को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मुद्दा विधायक डॉ. परिणय फुके द्वारा विधान परिषद में उठाया गया था।

सरकारी कर्मचारियों की सोशल मीडिया सक्रियता पर रोक की मांग

विधायक डॉ. परिणय फुके ने सदन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सोशल मीडिया पर रील्स बनाकर अपलोड कर रहे हैं, जिससे प्रशासन की छवि प्रभावित हो रही है।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर यह धारणा बनाई जा रही है कि ज़िला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक या पुलिस निरीक्षक ही पूरे क्षेत्र के मामलों को नियंत्रित कर रहे हैं। ऐसी पोस्ट और वीडियो प्रशासनिक अनुशासन को प्रभावित कर सकते हैं।

उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता जताई और इस पर सख्त नियम व उनके क्रियान्वयन की मांग की।

सरकारी रील्स से छवि पर असर, क्या होंगे नए नियम?

डॉ. परिणय फुके ने इस मुद्दे पर पहले भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था और अब विधान परिषद में सरकार से सवाल किया कि क्या सरकार सोशल मीडिया नियमों को नियंत्रित करने के लिए नया कानून लाएगी या मौजूदा कानूनों में संशोधन करेगी?

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जवाब में कहा कि 1979 में जब मौजूदा सेवा नियम बने थे, तब सोशल मीडिया अस्तित्व में नहीं था। अब समय के साथ नियमों में बदलाव की जरूरत है और सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने जा रही है।

सरकारी कर्मचारियों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर सख्ती

डॉ. फुके ने यह भी कहा कि कुछ सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ पोस्ट डाल रहे हैं और अपने कर्तव्य का महिमामंडन कर रहे हैं। इससे प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है।

सरकार का उद्देश्य सोशल मीडिया के माध्यम से जनता से जुड़ना और नागरिक सहभागिता को बढ़ावा देना है, लेकिन कुछ सरकारी कर्मचारियों द्वारा इसका दुरुपयोग किया जा रहा है।

गुजरात और जम्मू-कश्मीर सरकारों ने इस संबंध में पहले ही सख्त नियम बनाए हैं। इसके अलावा, लाल बहादुर शास्त्री प्रशासन अकादमी में भी इसको लेकर कड़े दिशानिर्देश हैं। महाराष्ट्र सरकार भी जल्द ही इस दिशा में कदम उठाने जा रही है।